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सरकारी कार्यालयों के साथ जेलों में होगा होम्यौपैथी से ईलाज
वर्ल्ड होम्योपैथी डे पर केद्रिय आयुष मंत्रालय की पहल
इंदौर । होम्यौपैथी से ईलाज के प्रति जनजागृति फैलाने के मकसद से अब केंद्रिय आयुष मंत्रालय द्वारा सरकारी दफ्तरों और जेल मे हौम्यौपैथी के केंद्र खोले जा रहे है। इंदौर की सेंट्रल जेल में मरीजो का ईलाज अब होम्यौपैथी डॉक्टर करेंगे ।
उपरोक्त जानकारी वर्ल्ड होम्योपैथी डे के मौके पर आयोजित जनजागृती पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए आयुष मंत्रालय भारत सरकार के साइंटिफिक एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य डॉ ए के द्विवेदी ने दी । उन्होंने बताया कि आयुष मंत्रालय लगातार वैकल्पिक चिकित्सा को प्रचारित कर रहा है जिसके चलते लोग बड़ी संख्या में होम्योपैथी जैसी पद्धति से इलाज करा रहे हैं ।
उन्होंने बताया कि होम्यौपैथी को बढावा देने के लिए मंत्रालय लगातार प्रयास कर रहा है। इसी के तहत इंदौर के कलेक्टर कार्यालय व ईएसआईएस विभाग में होम्यौपैथी क्लिनिक शुरु किये जा चुके है । धार रोड पर जिला अस्पताल में आयुष विंग शुरु किया गया है । इसके साथ ही मुसाखेडी मे आयुष अस्पताल का भूमिपूजन किया जा चुका है। उज्जैन के सिंहस्थ में भी होम्यौपैथी से 25000 लोगों का ईलाज किया गया था ।
इसी कडी में अब इंदौर के सेंट्रल जेल में हौम्यौपैथी से कैदियों का ईलाज किया जाएगा । हर माह के तीसरे शनिवार को इस तरह के केंप लगाकार मरीजो को राहत पंहुचाई जा रही थी लेकिन अब विभाग यंहा नियमित क्लीनिक खोलेगा । रेलवे एवं एयरफोर्स में भी हौम्यौपैथी विंग स्थापित की गई है। हौम्योपैथी की मांग लगातार बढ रही है जिसके चलते मंत्रालय 350 चिकित्सको की नियक्ति करने जा रहा है। सन 2017- 18 में मरीजो के इस विभाग का बजट 1700 करोड़ रखा गया है ।
डॉ द्विवेदी ने बताया कि होम्योपैथी को लेकर धारणा है कि इससे केवल छोटी बीमारियों का इलाज किया जाता है जबकि होम्योपैथी से असाध्य व जटिल रोगों का इलाज आसानी से और बगैर किसी तकलीफ के किया जा सकता है । कैंसर जैसी बीमारी में होम्योपैथी की दवाएं काफी कारगर है । एलोपैथी में कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी के साइड इफैक्ट्स होते हैं लेकिन होम्योपैथी में मरीज के शरीर को तकलीफ नहीं होती है ।
इसी तरह प्रोस्टेट प्लास्टिक एनीमिया , एवीएन , अस्थमा आर्थराइटिस आदि के केस में भी ऑपरेशन या सर्जरी की सलाह दी जाती है जबकि होम्योपैथी से बगैर ऑपरेशन किस तरह की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है । उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक इलाज से टॉन्सिल के ऑपरेशन में 90ः की कमी आई है जबकि पथरी के ऑपरेशन में भी 40ः की कमी आई है । होम्योपैथिक इलाज से बीमारियों की वापस आने की संभावना नहीं होती है जबकि अन्य पद्धति जैसे एलोपैथी आदि से इलाज कराने पर पथरी , फिशर ,फिशचुला , पाइल्स आदि बीमारियां फिर होने की संभावनाएं रहती हैं ।


